पिता की मृत्यु के बाद संपत्ति वितरण कैसे करे

यदि पिता की मृत्यु बिना वसीयत बनाए हो जाती है, तो भारतीय कानून के अनुसार पिता के संपत्ति वितरण करने के लिए कई तरह के कानून बनाए गए है. जिसके तहत पिता के मृत्यु के बाद अपने परिवार के बिच संपत्ति का वितरण कर सकते है.

लेकिन अधिकांश लोगो को इस कानून के बारे में जानकारी नही होता है. इसलिए अपने परिवार के बिच संपत्ति को लेकर बहुत बड़ा विवाद हो जाता है. इसलिए आर्टिकल में पूरी जानकारी दिया गया है. जिसके माध्यम से अपने पिता की मृत्यु के बाद संपत्ति का बटवारा कर सकते है. और परिवार ए बिच होने वाले विवदो से बच सकते है.

पिता की मृत्यु के बाद संपत्ति वितरण

यदि पिता अपने संपत्ति का वसीयत बनाए बिना ही मर जाते है तो इसके लिए भारत सरकार ने एक कानून बनया है. जिसके अंतर्गत उस संपत्ति को उसके वारिसो में भारतीय कानून के अनुसार परिवार के सभी सदस्यों को बेटे, बेटी, पत्नी और मां को सामान रूप से विभाजित किया जएगा. यदि बेटा और बेटी नबालिक है, तो उनकी संपत्ति उनके माँ के अधिकार में रहेगी.

पिता अपने मृत्यु से पहले अपने संपत्ति का वसीयत बना देता है, तो उस वसीयत में जिस जिस व्यक्ति का नाम होगा. उन सभी व्यक्तियों के बिच पिता के संपत्ति का विभाजित कर दिया जाता है. यदि कोई बेटा अपने पिता के संपत्ति का अधिकार प्राप्त करना चाहता है, तो उसके इक्छा के अनुसार संपत्ति को क़ानूनी रूप से अपने नाम पर ट्रान्सफर करा सकता है.

पिता की मृत्यु के बाद बेटी का संपत्ति में अधिकार

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के तहत, पिता की मृत्यु के बाद बेटी का संपत्ति में समान अधिकार होता है. लेकिन पिता ने अपने जीवन काल में खुद के कमाई से संपत्ति अर्जित नही किया हो तो उस संपत्ति में बेटा, बेटी, पिता की पत्नी और अन्य रिश्तेदारों का भी अधिकार हो सकता है.

पिता की मृत्यु के बाद बेटी के संपत्ति में अधिकार से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बाते

  • बेटी को पिता की संपत्ति में बेटे के समान हिस्सा दिया जाता है.
  • पैतृक संपत्ति में बेटियों और बेटों दोनों का समान हिस्सा का अधिकार होता है.
  • स्व-अर्जित संपत्ति में बेटियों और बेटों के अलावा, पिता, पत्नी और अन्य रिश्तेदारों का भी अधिकार हो सकता है.
  • यदि बेटी ने अपने पिता के जीवित रहते हुए अपने हिस्से का त्याग कर दिया हो. तो पिता के संपत्ति में बेटी का अधिकार नही होगा.

पिता की मृत्यु के बाद पति या पत्नी का संपत्ति में अधिकार

भारतीय कानून के अनुसार पिता की मृत्यु के बाद पति या पत्नी का संपत्ति में अधिकार निम्नलिखित कारणों पर निर्भर करता है. जो इस प्रकार है:

  • संपत्ति के प्रकार के आधार पर संपत्ति में पति या पत्नी का अधिकार अलग-अलग हो सकता है.
  • यदि मृतक के कोई बच्चे नहीं हैं, तो पति या पत्नी संपत्ति में एकमात्र अधिकार होगा.
  • यदि मृतक के बच्चे हैं, तो पति या पत्नी को संपत्ति का एक हिस्सा का अधिकार होगा.
  • यदि मृतक के बच्चे हैं और पति या पत्नी भी जीवित हैं, तो संपत्ति को निम्नलिखित श्रेणियों में वितरण किया जाएगा. जैसे:
    • पति या पत्नी
    • बच्चे
    • माता-पिता
    • भाई-बहन
  • यदि मृतक ने पहले से ही कोई वसीयत बनाया है, तो वसीयत के अनुसार संपत्ति का वितरण किया जाएगा.

पिता की मृत्यु के बाद भाइयों-बहनों का संपत्ति में अधिकार

पिता की मृत्यु के बाद भाइयों-बहनों का संपत्ति में अधिकार हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के अनुसार निर्धारित किया जाता है. इस कानून के अनुसार, पिता की पैतृक संपत्ति में बेटो के साथ-साथ बेटियों को भी समान अधिकार दिया जाता हैं.

यदि पिता ने अपनी मृत्यु से पहले वसीयत बनाया है तो उस वसीयत के नियम के अनुसार उसके संपत्ति में वितरण किया जाता है. और पीटना ने मृत्यु से पहले कोई वसीयत नहीं लिखी है, तो उनकी संपत्ति को क़ानूनी नियमो के अनुसार उत्तराधिकारियों के बीच समान रूप से विभाजित किया जाएगा.

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार पिता के मृत्यु बाद सम्पाती का वितरण

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम एक भारतीय कानून है जो 1956 में लागु किया है. यह कानून हिंदुओं के बीच संपत्ति के बटवारा करने के लिए लागू किया जाता है. यह अधिनियम सभी हिंदुओं पर लागू होता है, चाहे वो किसी भी जाति संप्रदाय से संबंधित हों.

इस कानून के अधिनियम के अंतर्गत यह बताया गया है की यदि पिता की मृत्यु बिना वसीयत बनाए हो जाती है. तो उसके सम्पत्ति में उनके वंशजों में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अंतर्गत बटवारा किया जाएगा. और यदि पिता ने मृत्यु से पहले वसीयत बाया है और उस वसीयत में जितने व्यक्ति का नाम है. उनके बिच संपति में बटवारा किया जाएगा.

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: FAQs

Q. पिता की मौत के बाद जमीन अपने नाम कैसे करें?

यदि पिता ने अपने संपत्ति का वसीयत बनाया है तो उस स्थिति में अपने वसीयत को सम्बंधित कार्यालय ले जाए. कार्यालय द्वारा वसीयत की जाँच की जाएगी. यदि उस वसीयत में आपके नाम होगे, तो पिता के जमीन को अपने नाम करा सकते है.

Q. यदि मृतक के पास कोई वसीयतनामा नहीं है, तो संपत्ति का वितरण कैसे किया जाता है?

यदि मृतक के पास कोई वसीयत नहीं है, तो हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के अनुसार संपत्ति का वितरण किया जाता है. इस अधिनियम के अनुसार, उत्तराधिकारियों को मृतक के माता-पिता, भाई-बहन, पत्नी, बच्चे आदि को सामान रूप में विभाजित किया जाता है.

Q. संपत्ति वितरण के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया क्या है?

एक आवेदन लिखे.
आवेदन पत्र में संपत्ति से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी लिखे.
आवेदन पत्र के साथ सभी संबंधित दस्तावेज संलग्न करें.
आवेदन पत्र को जिला न्यायालय में जमा करें.
इसके बाद क़ानूनी रूप से संपत्ति का वितरण किया जाएगा.

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